इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के कारण, लक्षण और उपचार 

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम- IBS

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम आंत में होने वाली बीमरी होती है जब शरीर मे आंत ठीक ढंग से काम नहीं करता है तो (संग्रहणी) या इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की बीमारी होती हैं ! जिसे आयुर्वेदिक भाषा में संग्रहणी कहा जाता है बहुत लोगो को अंग्रेजी दवाइयां खाकर 3 से 6 महीने तक परेशान रहते हैं लेकिन उन्हें आराम नही मिलता हैं ! लेकिन अगर इलाज ठीक ढंग या परहेज के साथ किया जाए तो ठीक हो जाता है ! इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम गलत खान पान और रहन सहन के कारण होता है ! यह पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा होता है !

संग्रहणी के लक्षण

संग्रहणी में रोगी के पेट फूल जाते हैं,पेट मे मरोड़ होती है,पेट मे दर्द होता है, गैस बनती है और काफी परेशान रहते हैं ! किसी किसी को कब्ज ज्यादा होती है कभी दस्त लग जाती है किसी को मल के साथ आंव आता है ! किसी किसी को मल के साथ खून भी आने लग जाता है इस बीमारी से रोगी का वजन तेजी से कम होने लग जाता है ! शरीर में खून की कमी होने लग जाती है इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम से रोगी बार बार दस्त से परेशान रहते हैं ! मल बिल्कुल टाइट आता है जिससे शरीर में कमजोरी आती है और वजन भी कम होता है !

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम क्यो होता है

जो भी कुछ खाते हैं वह आहार नली के जरिये आंतो में जाता है ! आंतो में उसका पाचन होता हैं
पाचन ऐसे होता है आंते जब सिकुड़ती औऱ फैलती है तब आहार का पाचन हो जाता है ! और मल अलग हो जाता है और रस शरीर मे लगता है जिससे ताकत और ऊर्जा मिलती है ! कई कारणों की वजह से आंत ठीक ढंग से काम नही कर पाती है ! अगर सिकुड़ती है तो सिकुड़ी रह जाती है और फैलती है तो फैली रह जाती है समय पर काम नही करती है आंतो में आई कमजोरी के कारण ऐसा होता है ! जिसे इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम कहा जाता है !

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के कारण

इसमे आंत व आंत की ऊपर की मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है पेट मे बहुत ज्यादा मात्रा में गैस बनना ! उसका सही ढंग से इलाज न करा पाना तो उसके कारण भी इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम हो जाता है ! कभी कभी आंत में बैक्टीरिया की संख्या ज्यादा हो जाती है किसी किसी को टेंशन व डिप्रेशन के कारण भी हो जाता है ! खासतौर पर महिलाओं में ज्यादा होता है क्योंकि टेंशन से तांत्रिक तंत्र जो है आंतड़ी को कंट्रोल नही कर पाती !

जिसकी वजह से पाचन नही कर पाती जिससे IBS की बीमारी हो जाती है ! कई लोगों को डायरिया की शिकायत हो जाती है और इलाज कराने के बाद भी ठीक नही होता है ! इसकी वजह से आंते कमजोर हो जाता है उसके बाद बवासीर की बीमारियां हो जाती है ! शरीर सूख जाती है घुटनों व हड्डियों में कड़क कड़क की आवाज़ आने लग जाती है !

हमारे शरीर के वात, कफ,पित्त आंतो को कमजोर कर देते हैं तो अगर तीनो दोष बढ़ जाये जिससे आंत ठीक ढंग से काम नही करता है ! और इर्रिटेबल बॉल सिंड्रोम की बीमारियां हो जाती है ! कई लोगों को पारिवारिक बीमारिया पायी जाती है जिसे वंशानुगत बोला जाता है ! कुछ लोगो मे दूध या दूध से बने प्रोडक्ट नही पचते ऐसे ही गेंहू भी नही पचते हैं !

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इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (संग्रहणी) में परहेज

इस बीमारी में हरी साग सब्जियां नही खानी है,दूध व दूध से बने प्रोडक्ट नही खाने है,दही खा सकते हैं शराब का इस्तेमाल न करें ! बाजार की तली भुनी हुई चीजें न खाएं ज्यादा घी व चिकनी चीजे न खाएं तेज मिर्च मसालों का इस्तेमाल न करें ! चाय, कॉफी, मीट, अंडा बासी खाने का इस्तेमाल न करे ठंडी चीजे न खाएं पिये ! मल मूत्र के वेग को न रोके ज्यादा मात्रा में भोजन न करें उपवास रखना खट्टी चीजे जैसे इमली, आचार, सॉस का इस्तेमाल न करें ! खाना खाने के बाद तुरन्त न लेटे खाने को चबा चबाकर खाएं !

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (संग्रहणी) में फायदेमंद चीजें

अनार, दही, केला खाना फायदेमंद है दही-चावल, दही-खिचड़ी, मूंग की धुली हुई दाल फायदेमंद होती है ! इसमें कम से कम रात के 7 से 8 घण्टे की नींद जरूर लें हल्का व्यायाम फायदेमंद होता है अगर तीन रोटी की भूख है तो दो ही रोटी खाये ! हल्का भोजन करें कोशिश करे खाने के साथ दही का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा करे ताकि संग्रहणी जल्द से जल्द ठीक हो जाये !

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (संग्रहणी)के अन्य उपचार

इस बीमारी में योग करना फायदेमंद होते हैं हफ्ते में एक बार गुनगुना पानी सुबह खाली पेट भरकर कर पिये ! उसके बाद दो उंगली मुँह में डालकर उल्टी करें ताकि अमाशय और छोटी आंत की पूरी सफाई हो जाये !

वृएचन क्रिया :– इस क्रिया में हरड़ का पाउडर बनाकर एक से दो चम्मच गर्म दूध या पानी के साथ रात को इसका इस्तेमाल करें ! ताकि सुबह होते होते पेट साफ हो जाये संक्रमण या बैक्टीरिया की सफाई हो जाये ! एक हफ्ते में वृएचन और दूसरे हफ्ते में वोमन करें !

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (संग्रहणी )के घरेलू उपचार :–

इसमे सबसे पहले सौफ, सोंठ और अनार दाना सूखा लें ! इन तीनो बराबर मात्रा में लेकर अलग अलग पीस लें फिर सबको एक जगह मिलाकर रख लें ! और उसमें से एक चम्मच एक गिलास लस्सी के साथ सुबह शाम को ले ! शाम को छः बजे के बाद न लें सुबह 8 से 9 बजे के बीच और शाम को 5 से 6 बजे के बीच लें ! सुबह शाम इस्तेमाल करने से संग्रहणी बिल्कुल जड़ से खत्म हो जाएगी! क्योंकि यह बड़ी आंत को ताकत देता है और इर्रिटेबल बॉल सिंड्रोम को ठीक करता है !

आयुर्वेदिक उपचार :–

बेलगिरी सूखी लें नागरमोथा और ईसबगोल की भूसी ये तीनो औषधियां पंसारी की दुकान पर आसानी से मिल जाएगी ! इनको पीस कर एक जगह मिलाकर रख ले एक चम्मच सुबह शाम लस्सी के साथ इस्तेमाल करे! खाना खाने के बाद ये दवा इस्तेमाल करें ! इसका इस्तेमाल करने से इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की बीमारी धीरे धीरे ठीक हो जाएगी !

रेडीमेड दवाएं :–

इस्कबेल दाना ले एक चम्मच सुबह और शाम लें लस्सी के साथ इस्तेमाल करे! वही सुबह 8 से 9 बजे के बीच और शाम को 5 से 6 बजे के करीब इस्तेमाल कर सकते हैं! जो लोग पाउडर व दाना नही ले पाते हैं वे कुड़जारिष्ट ले सकते हैं ! यह दवा आधा कप पानी मे 3 से 6 चम्मच मिलाकर लें ! सुबह और शाम खाना खाने के बाद इस्तेमाल करना है !

नोट :– इन तीन उपचारों में से कोई एक उपचार का इस्तेमाल करना चाहिए ! तीनो उपचारों का इस्तेमाल नही करना है !

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