कमर दर्द का कारण

कमर दर्द का कारण

पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कमर दर्द ज्यादा होती है! क्योंकि महिलाओं में हार्मोन्स का बदलाव जीवन भर होता है ! जैसे कि पीरियड्स, गर्भावस्था या महीना बंद होने के बाद जो मोनोपॉज का समय होता है उसके दौरान होता है !
इसके साथ साथ में महिलाओं के हड्डियों का ढाचे के आकार की वजह से महिलाओं में कमर का दर्द ज्यादा महसूस होता है !

महिलाओं में कमर दर्द का कारण :–

महिलाओं में कमर दर्द के कारण पीरियड्स में हो सकता है कई बार गर्भावस्था के तीसरे तिमाही में कमर में दर्द हो सकता है ! कमर में दर्द का एक ओर बहुत बड़ा कारण होता है वह होता है योनि में इंफेक्शन यानी सफेद पानी की शिकायत, यदि ओवरी में गांठ है या ओवरी में कैंसर है तभी भी कमर में दर्द हो सकता है ! कमर में दर्द बच्चेदानी में रसौली के कारण भी होता है जो कि अन्टोमेंट्री की शिकायत हो सकती है ! और कई बार प्रेगनेंसी के दौरान भी कमर में दर्द हो सकता है !

महिलाओं और पुरुषों में कमर दर्द का कारण :–

मैकेनिकल लॉ बैक पैन,साइक्रोइलियक जॉइंट डिस्क फंक्शन, साइटिका का दर्द,स्लिप डिस्क, पोलिफ़्रोमे सिंड्रोम, ओस्टियोपोरोसिस होने वाले फ़्रैक्चर आदि !

 

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मैकेनिकल लॉ बैक पैन :– कमर दर्द का कारण

यदि कोई ऐसा काम करने में झटका लगे,गलत तरीके से काम करने की वजह से,गलत तारीके से उठने बैठने की वजह जिसकी वजह से कमर में स्ट्रेन हो जाता है! जिससे कमर दर्द हो सकता है ! यह दर्द कमर तक ही सीमित रहता है दर्द होने पर काम को छोड देने से कमर दर्द में आराम मिल जाता है ! ये दर्द 3 से 4 दिन तक खुद से ठीक हो जाता है !

साइक्रोइलियक जॉइंट डिस्फंक्शन का दर्द :– कमर दर्द का कारण

ये परेशानी भी बैठने उठने और काम गलत तारीके से करने से होता है! इसमे कमर दर्द बीच मे नही होता है ! थोड़ा हिप्स की तरफ साइड में होता है यह दर्द कई बार जांघो तक महसूस होता है ! और ये मांसपेशियों के स्ट्रेच के कारण होता है यह कमर का दर्द अपने आप 4 से 5 दिन में ठीक हो जाता है ! इसके अलावा हफ्ते इस दर्द को ठीक होने में हफ्ते भी लग सकते हैं! इससे अधिक दर्द हो तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए !

साइटिका का दर्द :–

इस दर्द में कमर दर्द के साथ इलेक्ट्रॉनिक झटके की तरह महसूस होता है जो कमर से लेकर पैरों के पंजों तक होता है ! इस दर्द का कारण रीढ़ की हड्डियों में छोटे छोटे हड्डियां होती है उनके बीच मे एक गद्दी होती हैं ! जिसे डिस्क कहते हैं! कई बार उम्र के साथ ज्यादा वजन उठाने की वजह से या कोई भी चोट की वजह से डिस्क में कोई नुकसान हो जाता है ! और नुकीली हड्डिया बाहर की तरफ निकलती है दो हड्डियों के बीच मे जगह कम हो जाती है ! और जब नुकीली हड्डी की कोई नस के ऊपर दबाव डालती है तो इस दर्द के साथ साथ इलेक्ट्रॉनिक करंट महसूस होता है !

साइटिका के दर्द में सीधा लेटे अपने घुटनों को थोड़ा सा ऊपर की तरफ मोडें और बीच मे कम्फर्ट के हिसाब से तकिया रखे ! ऐसा करने से साइटिका का दर्द में बहुत आराम मिलेगा साथ साथ यह ध्यान रखना है! कि इस दर्द में आराम नही करना है चलना फिरना है क्योंकि इससे बहुत आराम मिलता है !

स्लिप डिस्क का दर्द :–

कई बार चोट या झटका लगने से डिस्क का हानि पहुँचती है और जो इस डिस्क का फ्ल्यूड होता है ! वह लीक कर जाता है इस तरह से लम्बे समय तक कमर में दर्द हो सकता है ! यदि डॉक्टर के पास जाते है तो डॉक्टर एक्सरे, एम आर आई और कई बार दवाइयां इंजेक्शन की सलाह देंगे ! फिजियो थैरेपी स्लिप डिस्क के लिए जरूरी होती है उसको लगातार छः महीने तक करवाना है !

पिरिफॉर्मिस सिंड्रोम का दर्द :–

कई बार गलत तारीके से उठने बैठने या झटका की वजह से,कोई काम करने की वजह से कमर दर्द शुरू हो सकती है ! कमर दर्द सारा दिन नही रहता है! यह केवल सीढ़िया चढ़ने में या बहुत देर तक बैठने से यह दर्द महसूस हो सकता है ! यह दर्द कमर के साथ साथ मसल्स में तनाव व प्रेशर की वजह से भी साइटिका का दर्द हो सकता है ! जिसकी वजह से कमर दर्द के साथ साथ झुनझुनाहट भी महसूस हो सकती है ! जो कमर दर्द से नीचे होते हुए जांघो से होते हुए पिंडियों के पास भी हो सकती है ! और पैरों के पंजों तक भी हो सकती है अगर इस तरह की कमर दर्द महसूस हो रही है! कई ऐसा भी हो सकता है कही साइटिका का दर्द हो सकता है !

नोट :– कमर का दर्द कई बार 50 से ऊपर महिलाओं में ज्यादा देखा गया है क्योंकि जैसे जैसे पीरियड्स बंद हो जाते है शरीर में डिस्ट्रोजन हार्मोन्स की कमी हो जाती है ! जिसकी वजह से हड्डियां खोखली होना शुरू हो जाती है हड्डियों में कैल्शियम की मात्रा कम हो जाती है ! जिससे थोड़ी चोट व झटके के साथ फ़्रैक्चर हो सकता है ! इसीलिए इस परेशानी से बचने के लिये अगर पीरियड्स बंद हो गए हो या पीरियड्स होने वाले हो ! मोनोपॉज शुरू हो गया हो तो कैल्शियम की टेबलेट का सेवन जरूर शुरू कर देना चाहिए !
इसके लिए ( शेल्क्स ओएस,शेल्क्स एम ले सकते हैं इसके साथ अगर विटामिन डी का लेवल कम है ! तो कैल्शिरोल को पीना चाहिए यदि 4 से 6 हफ्ते पिये! तो शरीर मे विटामिन डी का लेवल नॉर्मल हो जाएगा!

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